Rajasthan Gk | मौर्य – उत्तर / गुप्त-पूर्व काल | Rajasthan history in hindi

8. मौर्य – उत्तर / गुप्त-पूर्व काल

Rajasthan Gk | मौर्य काल | Rajasthan Gk in hindi
Rajasthan Gk | मौर्य - उत्तर / गुप्त-पूर्व काल
मौर्य वंश का स्थान शुंग वंश ने लिया। शुंग वंश की राजधानी विदिशा (पूर्वी मालवा ) थी। मौर्योत्तर काल में मध्य एशिया से आये यवन / यूनानी ( इण्डो-वैक्ट्रियन / इण्डो ग्रीक), शक (सीथियन), कुषाणों ने भारत के विभिन्न भागों में शासन स्थापित किए। यूनानी राजा मिनाण्डर ने 150 ई. पू. में मध्यमिका (वर्तमान नगरी) को अपने अधीन कर यवन .पू. राज्य की स्थापना की। यूनानी राजाओं के सिक्के राजस्थान के नगरी, नलियासर व बैराठ से प्राप्त हुए हैं। यवनों के बाद राजस्थान में शकों ने प्रवेश किया। नलियासर (सांभर के निकट) से मिले चांदी के सिक्कों से शकों के आगमन का पता चलता है। सौराष्ट्र से प्राप्त शक क्षत्रप उषवदात के लेख के अनुसार, शकों का राजा उज्जियनी, पुष्कर होता हुआ मथुरा गया तथा 57 ई. पू. तक वे राज्य करते रहे। इस लेख के अनुसार उषवदात ने पुष्कर में स्नान करके बड़ी संख्या में गायों का दान किया। कुषाण शासक कनिष्क (78-101 ई.) के शिलालेखों से यह पता चलता है कि उनका प्रभुत्व राजस्थान के पूर्वी भाग पर था। रूद्रदमन के जूनागढ़ अभिलेख / सुदर्शन झील अभिलेख (150 ई.) में यह उल्लेख मिलता है कि कुषाणों का राज्य मरु प्रदेश से साबरमती के आस-पास तक था।
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