Rajasthan History Notes 2023 Download || वैदिक काल (1500 – 600 ई०पूर्व) | Vedic Period in Hindi

4. वैदिक काल

Rajasthan Gk | वैदिक काल | Rajasthan history notes pdf

Rajasthan History Notes
भारत में आर्यों का आगमन 2000 ई. पू. से 1500 ई. पू. के मध्य हुआ। आर्य सर्वप्रथम पंजाब के क्षेत्र में बसे, तत्पश्चात् कुरुक्षेत्र के आस पास के प्रदेशों में बसे । ‘ऋग्वेद’ में सरस्वती (पधर) तथा दूषडती (धीतांग) का उल्लेख मिलता है। ‘ऋग्वेद’ में  सरस्वती को सबसे पवित्र नदी मानी गई है और इसे सिन्धुमाता (नदियों की माता) तथा नदीतमा (नदियों में अग्रवर्ती) कहा गया है। ‘ऋग्वेद’ के सप्तम मंडल की रचना सरस्वती नदी के तट पर घग्घर उपत्यका में हुई।
नोट उक्त दोनों नदियां वर्तमान राजस्थान की मरुभूमि में प्रवाह शील थी जो बाद में सूख गई। सम्प्रति सरस्वती को पुनर्जीवित करने के प्रयास किये जा रहे हैं।
आर्यों के राजस्थान में आकर बसने का प्रमाण अनूपगढ़, तरखानावाला व चाक आदि स्थलों की खुदाई से मिले हैं।
उत्तर वैदिक काल में भूकम्प तथा सूखे के कारण सरस्वती दृषद्वती का प्रदेश रहने के योग्य नहीं रह गया। फलस्वरूप इस क्षेत्र के लोग पूर्व की ओर उपजाऊ भूमि की तलाश में निकल पड़े और धीरे-धीरे यह क्षेत्र वीरान पड़ गया। उत्तर वैदिक कालीन ग्रंथ ‘शतपथ ब्राह्मण’ में आर्यों के स्थानान्तरण का विवरण मिलता है।
इसके अनुसार विदेश माधव, जोकि सरस्वती प्रदेश का राजा था, अपने पुरोहित गौतम रहुगण एवं प्रजा के साथ पूर्व की ओर निकल पड़ा । ‘शतपथ ब्राह्मण’ के अनुसार उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में भरत तथा मत्स्य बसते थे। मत्स्य नरेश द्वैतवन ने सरस्वती के तट पर 14 अश्वमेध यज्ञ किये थे । अनुश्रुतियों के अनुसार, उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी राजस्थान में मद्र व कुरु बसते थे। भरत, मत्स्य, मंद्र व कुरु आर्य थे। आर्यों के साथ अनार्यों के सहनिवास होने का उल्लेख मिलता है।
अनार्य जातियों में शाल्व / साल्व उत्तर-पूर्वी व दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में बसे हुए थे जबकि नाग दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में इस समय तक लोगों को लोहे के प्रयोग का ज्ञान हो गया था। राजस्थान में वैदिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करनेवाले जिन टीलों का उत्खनन किया गया है उनमें नोह (भरतपुर), जोधपुरा (जयपुर), विराटनगर (जयपुर) व सुनारी (झुंझुनू) प्रमुख हैं तथा इनका लौह-य -युग महती के विकास में योगदान है।
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