Rajasthan Gk | महाकाव्य काल | Rajasthan history in hindi

5. महाकाव्य काल

Rajasthan Gk | महाकाव्य काल | Rajasthan history in hindi 

‘रामायण’ (वाल्मीकि) आदि महाकाव्य ‘रामायण’ के अनुसार, बनवास के समय भगवान राम ने वर्तमान जयपुर के दक्षिण-पूर्व की ओर स्थित रामेश्वर तीर्थ पर यात्रा करते हुए एक रात का विश्राम किया था। ‘रामायण’ के ही अनुसार दक्षिण सागर ने अपने ऊपर जब सेतु बंधवाने से इंकार किया, तब उसे सुखाने के लिए भगवान राम ने उस पर अमोघ बाण चलाया, जिससे समुद्र के स्थान पर मरुकान्तार हो गया जो अब राजस्थान का पश्चिमोत्तर भाग है। भूगर्भशास्त्र भी इस बात की पुष्टि करता है कि जहाँ अभी रेगिस्तान है, वहाँ पहले कभी समुद्र लहराता था।
‘महाभारत’ (वेदव्यास): महाकाव्य ‘महाभारत’ में वर्तमान राजस्थान में स्थित राज्यों कुरु (अलवर का उत्तरी भाग), जांगल देश (बीकानेर व जोधपुर का उत्तरी भाग), मत्स्य देश (जयपुर का उत्तरी भाग), शूरसेन (भरतपुर, धौलपुर व करौली): साल्वपुत्र (अलदार), साल्वसेनी/सार्वसेनी (रेगिस्तानी भाग), मध्यमिका (चित्तौड़ के निकट) आदि का उल्लेख मिलता है। ‘महाभारत’ में पुष्कसरण्य (पुष्कर), अर्बुदाचल (आबू) आदि धार्मिक स्थलों का भी उल्लेख मिलता है। अनुश्रुति है कि पाण्डव 12 वर्ष के बनवास के बाद 1 वर्ष का अज्ञातवास छद्म वेश और नाम धारण कर मत्स्य देश के राजा विराट की राजधानी विराटनगर (बैराठ) में बिताये। जब महाभारत का युद्ध लड़ा गया तो मत्स्य नरेश विराट युद्धिष्ठिर की ओर से लड़ा और अपने अनेक वीरों के साथ वीरगति को प्राप्त हुआ।
उलूक प्रदेश (वर्तमान अलवर) का राजा महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ा। युद्ध के उपरांत पाण्डवों ने जब चक्रवर्ती राज्य की स्थापना की, तो नकुल ने नकर मरुभूमि व पुष्कर क्षेत्र पर विजय प्राप्त की तथा सहदेव ने मत्स्य व अवंति के राजाओं से अपनी अधीनता स्वीकार करवाई। पाण्डवों के चक्रवर्ती राज्य में लगभग सारा राजस्थान शामिल था।

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