Rajasthan Gk | मौर्य काल | Rajasthan Gk in hindi

17. मौर्य काल
Rajasthan Gk | मौर्य काल | Rajasthan Gk in hindi

राजस्थान के कुछ भाग मौर्यों के अधीन या प्रभाव क्षेत्र में थे। अशोक के वैराट लघु शिलालेख तथा सम्प्रति (अशोक का पौत्र) द्वारा बनवाये गये मंदिर की प्राप्ति से इस तथ्य की पुष्टि होती है। भाबू बैराट लघु शिलालेख राजस्थान के बैराट पर्वत की चोटी पर एक शिलाखंड पर मिला है, जिसे कनिंघम द्वारा कलकत्ता ले आया गया है। इस लघु शिलालेख में अशोक ने बौद्ध धर्म के त्रिरत्न (बुद्ध, धर्म व संघ) के प्रति अपनी आस्था प्रकट की है। यह आम जनता या कर्मचारी को संबोधित न होकर पुरोहितों को संबोधित है। यह एकमात्र अभिलेख है जिसमें उसने अपने आप को मगाधिराज (‘पियदस्सी लाजा मगध’) कहा है। राजस्थान में मीयों की मौजूदगी को साबित करने वाले अन्य अवशेष हैं-चित्तौड़ का किला व चित्रांग तालाब मौर्य राजा चित्रांग द्वारा निर्मित): चित्तौड़ से कुछ दूर स्थित मानसरोवर तालाब, जिस पर मौर्यवंशी राजा मान का नाम अंकित है; कोटा के निकट कणसबा शिवालय, जिस पर मौर्यवंशी राजा धवल का नाम अंकित है, आदि। इन प्रमाणों से मौयों के सामंतों या प्रशासनिक अधिकारियों का राजस्थान में अधिकार होना सिद्ध होता है।

8. मौर्य – उत्तर / गुप्त-पूर्व काल
मौर्य वंश का स्थान शुंग वंश ने लिया। शुंग वंश की राजधानी विदिशा (पूर्वी मालवा ) थी। मौर्योत्तर काल में मध्य एशिया से आये यवन / यूनानी ( इण्डो-वैक्ट्रियन / इण्डो ग्रीक), शक (सीथियन), कुषाणों ने भारत के विभिन्न भागों में शासन स्थापित किए। यूनानी राजा मिनाण्डर ने 150 ई. पू. में मध्यमिका (वर्तमान नगरी) को अपने अधीन कर यवन .पू. राज्य की स्थापना की। यूनानी राजाओं के सिक्के राजस्थान के नगरी, नलियासर व बैराठ से प्राप्त हुए हैं। यवनों के बाद राजस्थान में शकों ने प्रवेश किया। नलियासर (सांभर के निकट) से मिले चांदी के सिक्कों से शकों के आगमन का पता चलता है। सौराष्ट्र से प्राप्त शक क्षत्रप उषवदात के लेख के अनुसार, शकों का राजा उज्जियनी, पुष्कर होता हुआ मथुरा गया तथा 57 ई. पू. तक वे राज्य करते रहे। इस लेख के अनुसार उषवदात ने पुष्कर में स्नान करके बड़ी संख्या में गायों का दान किया। कुषाण शासक कनिष्क (78-101 ई.) के शिलालेखों से यह पता चलता है कि उनका प्रभुत्व राजस्थान के पूर्वी भाग पर था। रूद्रदमन के जूनागढ़ अभिलेख / सुदर्शन झील अभिलेख (150 ई.) में यह उल्लेख मिलता है कि कुषाणों का राज्य मरु प्रदेश से साबरमती के आस-पास तक था।

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