Rajasthan Gk | महाजनपद काल | Rajasthan gk in hindi

6. महाजनपद काल 
Rajasthan Gk | महाजनपद काल | Rajasthan gk in hindi

बौद्ध रचना ‘अंगुत्तर निकाय’ एवं जैन रचना ‘भगवती सुत्त’ में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। इन 16 महाजनपदों में से मत्स्य एवं अवन्ति राजस्थान में स्थित थे।
मत्स्य : विराट नामक संस्थापक के नाम पर मत्स्य महाजनपद की राजधानी का नाम विराटनगर (जयपुर) पड़ा। विराटनगर को वैराट / बैराठ भी कहा गया। मत्स्य कभी चेदि महाजनपद के अधीन था पर बाद में स्वतंत्र हो गया। कुरु व शूरसेन महाजनपदों के पतन के दौर में मत्स्य महाजनपद का क्षेत्र विस्तार हुआ। फलस्वरूप मत्स्य की राजधानी विराटनगर बड़ी समृद्ध हो गई। साहित्यिक स्रोतों में उल्लिखित ‘अपर मत्स्य’, ‘वीर मल्य इस महाजनपद की शाखाएँ थी। वैराट के पास बीजक की पहाड़ी पर एक गोलाकार बौद्ध मंदिर मिला है, जो ईंटों का बना है। यह राजस्थान का प्राचीनतम मंदिर माना जाता है।
अवन्ति: अवन्ति महाजनपद के दो भाग थे— उत्तरी अवन्ति (राजधानी-उज्जियनी) च दक्षिणी अवन्ति ( राजधानी-महिष्मती)। अवन्ति नरेश चण्डप्रद्योत महात्मा बुद्ध का समकालीन था। चण्डप्रद्योत विस्तारवादी था। उसने राज्य विस्तार किया। अवन्ति के चरमोत्कर्ष काल में उसके राज्य क्षेत्र के अंतर्गत समूचा पूर्वी राजस्थान, मालवा प्रदेश, मध्य प्रदेश व बुन्देलखण्ड के भाग शामिल थे। शूरसेन व मत्स्य भी किसी-न-किसी रूप में अवन्ति के प्रभाव क्षेत्र में थे। अवन्ति बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध केंद्र था। इसका आर्थिक महत्व भी था क्योंकि अनेक व्यापार मार्ग इस प्रदेश से होकर गुजरते थे। मगध नरेश शिशुनाग के समय इसे मगध में मिला लिया गया ।
पंजाब के मालव, शिवि, अर्जुनायन व यौधेय का राजस्थान स्थानान्तरण
327 ई. पू. में सिकन्दर महान (Alexender the Great ) के आक्रमण के कारण पंजाब के कई जातियों ने अपनी सुरक्षा तथा वंश को बचाये रखने के लिए राजस्थान की ओर बढ़े और वहीं बस गये जिनमें मालव, शिवि, अर्जुनायन, यौधेय आदि मुख्य थे।
मालवः- मालवों ने वागरचाल, नगर आदि स्थानों पर अधिकार कर लिया जो जयपुर संभाग में हैं। बाद में टोंक, अजमेर व मेवाड़ पर भी उन्होंने आधिपत्य स्थापित किया । रेड़ के उत्खनन से प्राप्त सामग्रियों से इनकी प्रभुता की जानकारी मिलती है। ये राजस्थान में 130 ई. पू. से 400 ई. तक एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में बने रहे जो यहाँ मिलने वाले सिक्के व यूप स्तम्भों से प्रमाणित है। मालव ब्राह्मण धर्म के अनुयायी थे।
शिवि:- शिवियों ने चित्तौड़ के आस-पास के क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया और मध्यमिका / मझमिका (नगरी) उसका प्रमुख केंद्र था। दूसरी सदी ई. पू. से चौथी सदी ई.. तक मध्यमिका का सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में महत्त्व बना रहा।
अर्जुनायन व यौधेय:- अर्जुनायनों ने भरतपुर अलवर क्षेत्र तथा यौधेयों ने गंगानगर बीकानेर क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। यौधेय चामुण्डा (शक्ति का एक रूप) के उपासक थे। जैन कथाओं के अनुसार अर्जुनायन व यौधेयों ने शकों कुषाणों से मोर्चा लिया। इनके सिक्कों से इनकी युद्धप्रियता व सेनाध्यक्षों की प्रमुखता पर प्रकाश पड़ता है।

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