Rajasthan GK 2023 in Hindi-जिलेवार प्रमुख तथ्य- India gk

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 जिलेवार प्रमुख तथ्य

 

  1. अजमेर(rajasthan gk) → 

  • राजा अजयपाल ने सातवीं सदी ई. में इस नगर की स्थापना की थी।(rajasthan gk)
  • ‘अजय मेरू’ की तलहटी में अजमेर शहर बसा हुआ है।
  • अजमेर को ‘राजस्थान के हृदय स्थल’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • अजमेर में मुस्लिमों का श्रद्धास्थल सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है।
  • अजमेर की ऐतिहासिक घटना में इंग्लैण्ड के बादशाह जेम्स प्रथम के राजदूत सर टॉमस से द्वारा सन् 1616 में जहांगीर के समक्ष प्रत्यय-पत्र प्रस्तुतीकरण सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
  • शाहजहाँ के सबसे बड़े पुत्र दारा शिकोह का जन्म अजमेर में हुआ था।
  • मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह मुस्लिमों के प्रमुख तीर्थ मक्का के बाद दूसरा प्रमुख तीर्थ माना जाता है। दरगाह का निर्माण इल्तुतमिश ने (1211-36 ई.) में प्रारम्भ किया तथा इसका समापन हुमायूं के समय में सोलहवीं सदी के आरम्भ में हुआ।
  • तारागढ़ दुर्ग का निर्माण राजा अजयपाल के द्वारा सातवीं सदी में कराया गया। तारागढ़ पहाड़ की तलहटी में स्थित ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य कला का अप्रतिम उदाहरण है, जिसका निर्माण मूलतः चौहान सम्राट बीसलदेव के द्वारा सन् 1153 ई. में संस्कृत पाठशाला के रूप में कराया गया था। 1192 ई. में मोहम्मद गोरी के आक्रमण के बाद संस्कृत पाठशाला को मस्जिद में बदल दिया गया। इस इमारत के सात में से तीन मेहराबों पर तीन-तीन पंक्तियाँ अरबी तथा नागरी लिपि में लिखी गई हैं। मुस्लिम फकीर पंजाबशाह के ‘अढ़ाई दिन का उसी लगने के कारण इस इमारत को ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ कहा जाने लगा।
  • अजमेर की ‘आना सागर झील का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के पितामह चौहान नरेश अर्णोराज या आणाती ने बारहवीं सदी के मध्य कराया था। इन्हीं के नाम पर इस झील का नाम ‘आना सागर झील’ पड़ा।
  • किशनगढ़ का नाम राजपूत चित्रकला की एक प्रसिद्ध शैली से सम्बन्धित है, जो विश्व भर में विख्यात है। यहाँ के शासक सावंत सिंह की प्रेमिका ‘बणी-ठणी’ के नाम से यह चित्र शैली प्रसिद्ध है।
  • अजमेर से 11 किमी दूर स्थित पुष्कर शहर हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है। तीर्थराज पुष्कर में 400 से अधिक मंदिर है। अतः इसे ‘देवताओं की नगरी’ भी कहा जाता है। भारत में ब्रह्माजी की एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर पुष्कर में ही है, जहाँ ब्रह्मा की पूजा की जाती है।
  • पुष्कर शहर के मध्य स्थित ‘पुष्कर झील’ का पुनर्निर्माण 1809 ई. में मराठा सरदारों ने कराया था।
  • पुष्कर में गुरु गोविन्द सिंह ने 1705 ई. में गुरु ग्रंथ साहब का पाठ किया था।
  • महात्मा गाँधी की अस्थियाँ पुष्कर झील’ में प्रवाहित की गई थी जहाँ पर उस स्थान को वर्तमान में गाँधी घाट’ के नाम से जाना जाता है।
  •  पुष्कर में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक पाँच दिवसीय धार्मिक मेला आयोजित होता है। धार्मिक मेले से पूर्व यहाँ एक विशाल पशु मेला (ऊँटों का) लगता है।

ब्यावर (beawar):- 

  1. अलवर(rajasthan gk)
  • अलवर को राजस्थान के ‘सिंह द्वार’ के नाम से जाना जाता है।
  • अलवर प्राचीन मत्स्य प्रदेश का हिस्सा रहा है जिसकी राजधानी विराटनगर थी।
  • अलवर जयपुर संभाग में स्थित है।
  • अलवर का किला हसन खाँ मेवाती (खानवा के युद्ध 1527 ई. में राणा सांगा का साथ देने वाला) ने बनवाया था ।
  • मुगल बादशाह बाबर ने इस किले का सामरिक महत्त्व समझते हुए अपने पुत्र हुमायूँ को मेवात क्षेत्र का राज्यपाल नियुक्त किया था। यही किला उसका मुख्यालय था।
  • मुगल बादशाह अकबर ने अपने पुत्र सलीम (जहाँगीर) को इसी किले में नजरबंद किया था।
  • अलवर दुर्ग के पास ही स्थित ‘मूसी महारानी की छतरी है, जो राजपूत स्थापत्य कला की एक अद्भुत मिसाल है।
  • तत्कालीन महाराजा बख्तावर सिंह और उनकी महारानी मूसी की स्मृति में बनी यह छतरी संगमरमर के 80 खंभों पर टिकी है
  • अलवर में सिंचाई की दृष्टि से सन् 1910 ई. में महाराज जयसिंह द्वारा ‘जयसमंद बांध का निर्माण कराया गया था।
  • अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य 1955 ई. में ‘सरिस्का अभयारण्य’ में बाघों के सुरक्षित क्षेत्र ‘टाइगर सेंक्चुरी’ की स्थापना टाइगर प्रोजेक्ट के तहत की गई।
  • ‘ताल-वृक्ष’ अलवर का एक सुरम्य स्थल है, जो महालन्टवी मांडव्य की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है। ‘ताल-वृक्ष’ में गंगा माता का मंदिर है और उसके नीचे गर्म एवं ठंडे पानी के जलकुण्ड बने हुए हैं।
  • उज्जैन के राजा और महायोगी भर्तृहरि ने अपने अंतिम दिनों में अलवर को ही अपनी तपस्थली बनाया था।
  • अलवर नगर के राजगढ़ कस्बे में स्थित कांकवोरी किले में शाहजहाँ के पुत्र दारा शिकोह को कैदी की तरह रखा गया था।
  • अलवर के पाण्डुपोल नामक स्थान पर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी व पंचमी को हनुमान जी का लक्खी मेला लगता है।
  • अलवर के रूपवास में जगन्नाथ जी महाराज का लक्खी मेला आषाढ़ सुदी 8-13 तक लगता है, जिसमें जगन्नाथ जी की रथ यात्रा धूम-धाम से निकाली जाती है।
  1. बांसवाड़ा(rajasthan gk)
  • बांस बहुल क्षेत्र होने के कारण ही यह इलाका बासवाड़ा कहलाया ।
  • पहले बांसवाड़ा पर क्षेपों, गुप्तों, हूणों एवं परमारों का वर्चस्व था।
  • परमारों की राजधानी उत्थुनका अथवा अर्थना बांसवाड़ा में ही है।
  • 1949 ई में बांसवाड़ा भारतीय गणराज्य का अंग बना ।
  •  बासवाड़ा जिले की 70% से अधिक जनसंख्या आदिवासी भीलों की है।
  1. बाड़मेर(rajasthan gk)
  • भीमाजी रतनावट ने 1585 ई. में बाड़मेर बसाया ।
  • बाड़मेर जिला पश्चिमी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर होने के कारण महत्त्वपूर्ण है।
  • 1965 एवं 1971 में भारत-पाक युद्ध का क्षेत्र मुख्य रूप से यही जिला रहा है।
  • बाडमेर जोधपुर संभाग में स्थित है।
  • ऐसी मान्यता है कि पाण्डवों ने अपने वनवास का अंतिम समय बाड़मेर क्षेत्र में ही छिपकर विताया।
  • पन्द्रह दिवसीय विशाल मल्लीनाथ जी का पशु मेला इसी जिले में लगता है। इसे तिलवाड़ा पशु मेला के नाम से भी जाना जाता है।
  • खारे पानी की झील पंचपद्रा बाड़मेर से 62 किमी दूर बाड़मेर-जोधपुर मार्ग पर स्थित हैं।
  • यहाँ का प्रमुख उत्सव बाड़मेर-थार समारोह है, जो शीतला अष्टमी के अवसर पर मनाया जाता है।
  1. भरतपुर(rajasthan gk)
  • यहाँ स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान विश्व प्रसिद्ध है।
  •  केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व धरोहर (World Heritage) सूची में शामिल किया गया है (1985 ई.)।
  • यहाँ पर साइबेरिया से दुर्लभ प्रजाति के सारस ‘साइबेरियन क्रेन’ आते हैं।
  1. भीलवाड़ा(rajasthan gk)
  • इस क्षेत्र की एक टकसाल में ‘भिलाड़ी’ नाम के सिक्के ढाले जाते थे, इसलिए इसका नाम भीलवाड़ा पड़ा।
  • भीलवाड़ा वस्त्र उत्पादन के क्षेत्र में राजस्थान का अग्रणी जिला है।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किसान आन्दोलन के लिए प्रसिद्ध बिजीलिया भीलवाड़ा में स्थित है।
  • भीलवाड़ा जिला पारम्परिक ‘फड़’ चित्रकला के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
  1. बीकानेर(rajasthan gk)
  • बीकानेर शहर की स्थापना राव बीकाजी ने सन् 1488 ई. में की थी।
  • पुरातत्वविदों के अनुसार यह क्षेत्र सरस्वती नदी की घाटी है
  • बीकानेर में सिंधु घाटी एवं वैदिक संस्कृति के अवशेष साथ-साथ मिले हैं।
  • बीकानेर के प्रसिद्ध जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण राम सिंह ने 1593 ई. में करवाया था।
  • 5 नवम्बर, 1937 ई. को महाराज गंगा सिंह के स्वर्ण जयंती समारोह की संध्या में बीकानेर में गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय खोला गया।
  • बीकानेर में स्थित अनुसंधान केन्द्र एशिया में अपनी तरह का पहला अनुसंधान केना है।
  • बीकानेर के देशनोक ग्राम में करणीमाता का सुप्रसिद्ध मंदिर दर्शनीय है।
  • बीकानेर में प्रतिवर्ष जनवरी में ऊँट महोत्सव मनाया जाता है।
  1. बूंदी(rajasthan gk)
  • लोक मान्यता है कि बूंदा मीणा ने बूंदी बसाई थी।
  • हाडा चौहानों का प्रभुत्व होने के कारण यह क्षेत्र ‘हाड़ौती ‘ कहलाया।
  • बूंदी जिला कोटा संभाग के अन्तर्गत आता है।
  • राय राजावर सिंह ने सन् 1354 ई. में 1426 फीट ऊँचे पहाड़ पर तारागढ़ नामक जाता है। दुर्ग बूंदी में बनवाया था।
  • प्रति वर्ष बूंदी स्थापना दिवस, 24 जून को बूंदी महोत्सव मनाया
  1. चित्तौड़गढ़(rajasthan gk)
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग बनवाने का श्रेय चित्रांगद मौर्य को है।
  • चित्रांगद के नाम पर इस स्थान का नाम ‘चित्रकूट’ पड़ा, जिसका अपभ्रंश चित्तौड़ है।
  • चित्तौड़गढ़ जिला उदयपुर संभाग में स्थित है।
  • चित्तौड़गढ़ का कीर्ति स्तम्भ (Tower of Fame ) जो 22 मीटर ऊँचा तथा सतमंजिला है. प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव को समर्पित है। कीर्ति स्तम्भ का निर्माण एक जैन व्यापारी जीजा ने 12वीं सदी ई. में कराया।
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग का विजय स्तम्भ (Tower of Victory ) जो 122 फीट ऊँचा तथा नौ मंजिला है, भारतीय स्थापत्य कला का एक अद्वितीय नमूना है। इस स्तम्भ का निर्माण मेवाड़ नरेश राणा कुम्भा ने 15वीं सदी ई. में कराया।
  • चित्तौड़गढ़ की खेवा कला जो काँच पर सोने का सूक्ष्म चित्रांकन का कार्य है, राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
  • राजस्थान राज्य के प्रथम परमाणु विद्युत् गृह की स्थापना चितौड़गढ़ जिला के रावतभाटा में 1972 ई. में की गई।
  1. धौलपुर(rajasthan gk)
  • 15 अप्रैल, 1982 ई. को धौलपुर जिला राजस्थान का 27वाँ जिला बना ।
  • धौलपुर जिला भरतपुर संभाग में स्थित है।
  • लोगों की मान्यता है कि धौलपुर के तीर्थस्थल मचकुण्ड में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि मचकुण्ड में वर्षा के दिनों में पहाड़ों से आया पानी एकत्रित होता है, अतः उसमें गंधक तथा अन्य रसायन मिले होते हैं, जो चर्म रोगों को ठीक करने में सहायक माने जाते हैं।
  • धौलपुर में शेरगढ़ का किला राजा मालदेव ने बनवाया था।
  1. डूंगरपुर(rajasthan gk)
  • रावल वीर सिंह ने सन् 1536 ई. में डूंगरपुर की स्थापना की थी।
  • डूंगरपुर जिला उदयपुर संभाग में स्थित है।
  • डूंगरपुर में स्थित गेपसागर का निर्माण महारावल गोपीनाथ द्वारा कराया गया था।
  • डूंगरपुर में स्थित जूना महल करीब 750 वर्ष पुराना है।
  • इस सात मजिले महल की नींव 1282 ई. में कार्तिक शुक्ल एकादशी को रखी थी।
  • आदिवासियों के महाकुंभ येणेशवर धाम पर हर वर्ष माघ माह की पूर्णिमा को मेला लगता है।
  1. हनुमानगढ़(rajasthan gk)
  • हनुमानगढ़ में स्थित भटनेर दुर्ग का निर्माण जैसलमेर के राजा भूपत ने 295 ई. में करवाया था।
  • हनुमानगढ़ में राजस्थान के प्रसिद्ध संत गोगाजी का प्रसिद्ध मंदिर गोगाजी की मेड़ी है।

 

  • यहाँ पर सांगरिया संग्रहालय स्थित है, जो शिक्षा संत स्वामी केशवानन्द की देन है।
  • हनुमानगढ़ में कालीबंगा सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जो विश्व के पर्यटन पुरातत्व मानचित्र पर अपना अलग स्थान रखता है।
  1. जयपुर(rajasthan gk)
  • जयपुर ‘भारत का पेरिस’ और ‘गुलाबी नगर’ के नाम से प्रसिद्ध है।
  • जयपुर बेजोड़ नगर नियोजन के लिए विश्वविख्यात है।
  • जयपुर को राजस्थान की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है।
  • जयपुर की स्थापना 18 नवम्बर, 1727 ई. को सवाई जय सिंह / जयसिंह द्वितीय ने की थी।
  • सवाई जयसिंह के प्रमुख वास्तुकार और नगर नियोजक श्री विद्याधर थे, जिनकी स्थापत्य कला ने जयपुर को देश-विदेश में अद्वितीय स्थान दिलाया।
  • जयपुर को नौ वर्गों के सिद्धान्त के आधार पर बसाया गया।
  • जयपुर के बीचों बीच सिटी पैलेस है। यह राजसी निवास परम्परागत राजस्थानी व मुगल स्थापत्य कला का एक प्रभावशाली मिश्रण है।
  • जयपुर में प्रसिद्ध व विस्तृत वेधशाला है जो ज्योतिष मंत्रालय’ या ‘जंतर-मंतर’ के नाम से जानी जाती है। इसका निर्माण 1728 ई. में खगोलज्ञ सवाई जयसिंह द्वारा करवाया गया था।
  • वर्ष 2010 ई. में संयुक्त राष्ट्र संघ ने जंतर मंतर (जयपुर) को विश्व विरासत (World Heritage) सूची में शामिल किया।
  • जयपुर में स्थित सिटी पैलेस के परिसर में स्थित ‘हवा महल’ का निर्माण महाराजा प्रतापसिंह ने सन् 1799 ई. में करवाया था।
  • जयपुर में नाहरगढ़ के ठीक नीचे राजघरानों के निजी श्मशान है जिन्हें ‘गेटोर की छतरियाँ कहते हैं।
  • जयपुर के आमेर के भव्य महलों में हिन्दू एवं पारसी निर्माण शैली का मिश्रण है।
  • आमेर के महलों का निर्माण राजा मानसिंह (प्रथम) ने 17वी शताब्दी के आरंभ में करवाया था। महलो का निर्माण कार्य सवाई जयसिंह के शासनकाल तक चलता रहा ।
  • जयपुर में ही विश्व प्रसिद्ध ‘खारे पानी की झील’ सांभर झील स्थित है। यूनेस्को ने अपनी विश्व विरासत सूची में शामिल किया है।
  • जयपुर का प्राचीन उद्योग गलीचे की बुनाई और उससे जुड़ा नमदा उद्योग है।
  • जयपुर का प्रसिद्ध सावन की तीज’ के मेले का अपना अलग महत्व है।
  • होली के दिन जयपुर के चौगान स्टेडियम में हाथी समारोह मनाया जाता है।
  • 2019 ई. में यूनेस्को ने जयपुर को ‘विश्व विरासत सूची (World Heritage List) में शामिल किया। अहमदाबाद के बाद जयपुर भारत का दूसरा शहर है जिसे
  1. जैसलमेर(rajasthan gk)
  • यदुवंशी भाटी राजपूत महारावल जैसल ने 1156 ई. में जैसलमेर शहर बसाया था।
  • जैसलमेर के उत्तर और पश्चिम में देश की अंतरर्राष्ट्रीय सीमा है, जो पाकिस्तान से मिली हुई है।
  • जैसलमेर, जोधपुर संभाग में स्थित है।
  • जैसलमेर दुर्ग को ‘सोनार किला’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • दुर्ग में स्थित जैन मंदिरों के तहखानों में ‘जिनभद्र सूरि ज्ञान भंडार’ बना हुआ है।
  • जैसलमेर के पोखरण में लाल पत्थरों से निर्मित सुंदर दुर्ग है, जिसका निर्माण सन् 1550 ई. में राव मालदेव ने करवाया था।
  1. झालावाड़(rajasthan gk)
  • मुगलकाल में झालावाड़ मालवा प्रदेश का हिस्सा था।
  • झालावाड़ को ‘झालाओं की भूमि’ से परिभाषित किया गया है, जो भूतपूर्व झालावाड़ राज्य के शासक वंश में से थे
  • झालावाड़ राज्य के निर्माण में मुख्यतः जालिम सिंह झाला (प्रथम) का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
  • झालावाड़, कोटा संभाग में स्थित है।
  • झालावाड़ स्थित गढ़भवन पैलेस का निर्माण सन् 1838 ई. में झाला राजा मदन सिंह द्वारा कराया गया था।
  • झालावाड़ जिले में स्थित झालरापाटन है जिसे ‘घण्टियों का शहर’ भी कहते हैं। झालावाड़ स्थित इस क्षेत्र में कई स्थानों पर पत्थरों के विशाल खंडों को काटकर बनाई गई गुफाएँ और स्तूप है।
  • बिन्दौरी झालावाड़ का मुख्य लोक नृत्य है।
  1. जोधपुर(rajasthan gk)
  • जोधपुर को ‘थार मरुस्थल का प्रवेश द्वार’ तथा ‘सूर्य नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है। जोधपुर को स्थानीय भाषा में ‘जोधाणा’ के नाम से जाना जाता है।
  • राव जोधा जी ने सन् 1459 ई. में जोधपुर की स्थापना की थी।
  • जोधपुर की पश्चिमी सीमा जैसलमेर जिले से होती हुई पाकिस्तान की सीमा तक जाती है।
  • जोधपुर संभागीय मुख्यालय है।
  • जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग की स्थापना 12 मई, 1459 जिसे मयूरध्वज के नाम से भी जाना जाता है।
  • ई. को राव जोधा ने की थी प्राप्त है।
  • एशिया के भव्य प्रासादों में जोधपुर के उम्मेद भवन को शीर्ष स्थान
  • इस प्रासाद की स्थापना 18 नवम्बर, 1928 ई. को तत्कालीन शासक उम्मेद सिंह ने की थी। 1940 ई. में यह बनकर पूर्ण हुआ था।
  • प्रतिवर्ष जोधपुर में मारवाड़ महोत्सव आयोजित किया जाता है।
  1. कोटा(rajasthan gk)
  • बूदू के राजा जैतसिंह ने भील शासक कोटिया को मारकर यह क्षेत्र अपने अधिकार में ले लिया था।
  • उसी भील शासक कोटिया के नाम पर इस स्थान का नाम कोटहा (कोटा) रखा गया है। कोटा जिला मुख्यालय संभागीय स्तर का मुख्यालय है।
  • कोटा में चम्बल नदी के तट पर 10 एकड़ भूमि में चम्बल उद्यान स्थित है। चम्बल उद्यान के निकट स्थित यातायात प्रशिक्षण पार्क राजस्थान का प्रथम एवं देश के सर्वश्रेष्ठ उद्यानों में एक है।
  • कोटा में पर्यटकों के वन भ्रमण हेतु मुकन्दरा हिल्स वन्यजीव अभयारण्य स्थित है।
  • विजय पर्व के रूप में मनाया जाने वाला कोटा का दशहरा देश भर में प्रसिद्ध है।
  • कोटा की कोटा डोरिया साड़ी देशभर में प्रसिद्ध है।
  1. पाली(rajasthan gk)
  • पाली में प्रागैतिहासिक कालीन, रामायण एवं महाभारत के अवशेष मौजूद हैं।
  • प्राचीन गणराज्यों में यह अर्बुद प्रदेश के रूप में जाना जाता था। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भारत भ्रमण के दौरान इसे गुर्जर प्रदेश के रूप में जाना था।
  • पाली जिला जोधपुर संभाग में आता है।
  • विविध प्रकार के 24 मण्डपों से सुसज्जित 1444 स्तम्भों सहित चार सिंह द्वार व 84 देव कुलिकाओं से सुशोभित रणकपुर जैन मंदिर पाली जिले में स्थित है
  • पश्चिम राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध जिसकी क्षमता छह सौ करोड़ घन फीट जल की है, ‘जवाई बाँध’ पाली जिले में स्थित है।
  • पाली जिले का ‘तेरहताली लोक नृत्य देश-विदेश में विख्यात है।
  • जिले के प्रमुख मेलों में ‘रामदेवजी का मेला’ रायपुर के निरंटिया खुर्द ग्राम में प्रतिवर्ष दो दिन के लिए लगता है।
  1. राजसमंद(rajasthan gk)
  • राजस्थान सरकार ने 31 मार्च, 1991 ई. को एक अधिसूचना जारी कर राजसमंद जिले के गठन की घोषणा की तथा 10 अप्रैल, 1991 ई. को यह जिला अस्तित्व में आया।
  • राजसमंद की स्थापना 17वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में 1660 ई. में महाराणा राजसिंह द्वारा की गई थी
  • महाराणा राजसिंह द्वारा सन् 1669 से 1676 तक के वर्षों में बनवायी गयी राजसमंद झील मेवाड़ क्षेत्र की विशालतम झीलों में से एक
  • महाराणा राजसिंह द्वारा सन् 1671 ई. में निर्मित द्वारिकाधीश मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल है।
  • राजसमंद में इतिहास प्रसिद्ध रणस्थली हल्दी पाटी स्थित है।
  • राजसमंद में स्थित महाराणा कुम्भा द्वारा 1448 ई में बनवाया गया कुम्भलगढ़ दुर्ग स्थित है।
  1. सवाई माधोपुर(rajasthan gk)
  • जयपुर के पूर्व महाराजा माधौसिंह प्रथम के नाम पर 15 मई, 1949 ई. को माधोपुर जिला बनाया गया। सवाई
  • सवाई माधोपुर जिले में चौहान वंश का ऐतिहासिक रणथम्भोर दुर्ग स्थित है। अपनी प्राकृतिक बनावट व सुरक्षात्मक दृष्टि से अमेध यह दुर्ग विश्व में
  • सवाई माधोपुर में रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। अनूठा है।
  1. सिरोही(rajasthan gk)
  • प्राचीन साहित्य में सिरोही को ‘अर्बुद प्रदेश’ कहा गया है।
  • सुप्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल टॉड के अनुसार सिरोही नगर का मूल नाम शिवपुरी था। सिरोही जिला जोधपुर संभाग में स्थित है। सिरोही जिले का एकमात्र पर्यटन स्थल आबू पर्वत है।
  • सिरोही में मरू-गुर्जर संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
  • कुटीर उद्योगों में सिरोही जिला लोहा बनाने में अग्रणी रहा है।
  • माउन्ट आबू में सर्वोतम रमणीक झील ‘नक्की झील’ जिसके बारे में किवदन्ती है
  • कि देवताओं ने नाखूनों से खोदा था, इसलिए इस झील का नाम नक्की झील पड़ा।
  1. टोंक(rajasthan gk)
  • टोंक जिले में बांसलपुर बाँध बनाया गया है।
  • टोंक जिला महाभारत काल में संपादलक्ष था ।
  • टोंक जिला, अजमेर संभाग में स्थित है।
  • टोक में अरबी एवं फारसी शोध संस्थान स्थित है।
  • टोंक के गुमानपुरा गाँव में चट्टान को उत्कीर्ण कर हाथी बनाया गया है जिसे ‘हाथी भाटा’ के नाम से जाना जाता है।
  1. उदयपुर(rajasthan gk)
  • उदयपुर की ‘राजस्थान का कश्मीर‘, ‘सैलानियों का स्वर्ग’, ‘झीलों की नगरी तथा ‘फाउंटेन और माउंटेन का शहर’ जैसे नामों से विभूषित किया जाता है। स्वतंत्रतापूर्व उदयपुर मेवाड़ रियासत की राजधानी थी।
  • मेवाड़ के महाराज उदयसिंह ने सन् 1559 ई. में इस सुन्दर नगर की स्थापना की थी।
  • उदयपुर के राजमहल इतने सुन्दर और भव्य है कि प्रसिद्ध इतिहासकार फर्ग्यूसन ने इन्हें राजस्थान के विडंसर महलों’ की संज्ञा दी।
  • उदयपुर की पिछोला झील के तट से लगभग 800 फीट की दूरी पर एक टापू पर ‘जगनिवास महल’ वर्तमान में ‘लेक पैलेस होटल’ का निर्माण महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने सन् 1749 ई. में करवाया था।
  • उदयपुर की प्रसिद्ध ‘फतहसागर झील का निर्माण सर्वप्रथम सन् 1678 ई. में महाराणा जयसिंह ने करवाया या परन्तु एक बार अतिवृष्टि ने इसे तहस नहस कर दिया,
  • जिसके बाद इसे पुनः निर्मित करवाने का श्रेय महाराणा फतहसिंह को है। इनके नाम पर ही इसका नाम फतह सागर झील रखा गया।
  • उदयपुर का भारतीय लोक कला मण्डल देश-विदेश में अपने नाट्य नृत्य एव
  • कठपुतली प्रदर्शनों से विशिष्ट ख्याति अर्जित कर चुका
  • उदयपुर के हवाला ग्राम में 1989 ई. में एक शिल्पग्राम का सृजन किया गया। विश्व में मीठे पानी की मानव निर्मित सबसे बड़ी झील ‘जयसमंद झील’ उदयपुर है । में है।
  • उदयपुर में हर वर्ष गणगौर के त्योहार पर दो दिवसीय ‘मेवाड़ महोत्सव तथा हर वर्ष दिसम्बर में ‘शिल्प ग्राम उत्सव मनाया जाता है।
  1. गंगानगर(rajasthan gk)

rajasthan gk

  • महाराजा गंगा सिंह के नाम पर इस जिले का नाम ‘गंगानगर’ पड़ा। इससे पूर्व यह नगर बीकानेर रियासत में सम्मिलित था।
  • गंगानगर राजस्थान का सबसे उत्तरी जिला है। गंगानगर की सीमा पश्चिम में पाकिस्तान से तथा उत्तर में पंजाब से स्पर्श करती है।
  • 30 मार्च, 1949 को यह राजस्थान का नया जिला बना । गंगानगर में सर्वाधिक सिंचाई नहरों के माध्यम से होती है।
  • गंगानगर को ‘राजस्थान का अन्नागार’ और ‘धान का कटोरा’ भी कहा जाता है। गंगानगर में रूस की सहायता से 15 अगस्त, 1956 को सूरतगढ़ यात्रिक फॉर्म की स्थापना की गई। यह एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक फॉर्म है, जो 12,410 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
  • गंगानगर को हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का संगम स्थल माना जाता है।
  • राजस्थान में दूध का सर्वाधिक उत्पादन गंगानगर जिले में होता है।
  • पाकिस्तान की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा का प्रारम्भिक बिन्दु गंगानगर जिले का ‘हिन्दुमलकोट’ है।
  • गंगानगर जिले में राज्य का पहला सुपर थर्मल पावर स्टेशन स्थापित किया गया।
  • राजस्थान में शुष्क बंदरगाह की स्थापना गंगानगर में की गई है।
  • गंगानगर जिले में ‘यांत्रिक खेती’ की जाति है। यहाँ सूरतगढ़ और जैतसर में यांत्रिक फॉर्म है।
  • गंगानगर में कृषि अनुसन्धान केन्द्र स्थित है।
  • अमेरिकी कपास का उत्पादन मुख्यतः गंगानगर जिले में होता है।
  1. चुरू(rajasthan gk)
  • चुरू की स्थापना 1620 ई. में ‘चुहरू’ नामक एक जाट ने की थी। इसके पहले यह बीकानेर के शासकों के अधीन था। थार मरुभूमि के बड़े-बड़े बालुका स्तूपों से आच्छादित चुरू जिला वहादुरी, साहस एवं देश भक्ति के लिए विख्यात है।
  • चुरू जिले को ‘गोगाजी की तीर्थस्थली’ के रूप में जाना जाता है।
  • चुरू जिले को ‘शेखावटी प्रदेश’ भी कहा जाता है।
  • चुरू जिले में कोई नदी नहीं बहती है।
  • तालछापर अभयारण्य चुरू जिले में स्थित है।
  • राजस्थान का सर्वाधिक ठंडा जिला चुरू है।
  • चुरू राजस्थान का सबसे कम वन वाला जिला है।
  • लाल पत्थर से निर्मित सर्वधर्म सद्भाव का प्रतीक ‘धर्म स्तूप’ चुरू जिले का प्रमुख दर्शनीय स्थल है।
  1. झुंझुनू (rajasthan gk)
  • 5वी 6ठी शताब्दी में गुर्जरों के काल में झुंझुनू बसाया गया था।
  • झुंझुनू जिले को ‘शेखावती का सिरमौर कहा जाता है।
  • सुल्तान फिरोज तुगलक के बाद कायमखानी वंशज अस्तित्व में आया।
  • कहा जाता है कि कायम खां के बेटे मुहम्मद खां ने झुंझुनू में अपना शासन कायम किया।
  • 1730 ई. में राजपूत शासक शार्दुल सिंह ने झुंझुनू पर अधिकार कर लिया।
  • झुंझुनू का अंतिम नबाब रुहेल खां था, जो आस-पास के अपने ही वंशजों से प्रताड़ित था।
  • रुहेल खां की मृत्यु के बाद 1887 ई. में झुंझुनू पर शेखावट राजपूतों का आधिपत्य हो गया।
  • 1834 ई. में झुंझुनू में मेजर हेनरी फोस्टर ने एक फौज का गठन किया, जिसका नाम ‘शेखावटी ब्रिगेड’ रखा गया था।
  • झुंझुनू जिले में जर्मनी के सहयोग से ‘आपणी जल परियोजना शुरू की गई।
  • खेतड़ी नरेश ने नरेन्द्रनाथ का नाम बदलकर ‘स्वामी विवेकानन्द’ रखा था।
  • पंडित झावरमल शर्मा को ‘पत्रकारिता का भीष्म पितामह’ जाता है। वे झुंझुनू के रहने वाले थे।
  • खेतड़ी भारत में ‘ताम्र नगरी’ के रूप में प्रसिद्ध है।
  • झुंझुनू स्थित ‘किरोड़ी’ राधाकृष्ण मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। झुंझुनू स्थित पिलानी ‘बिड़ला सिटी’ के उपनाम से प्रसिद्ध है।
  • महनसर भित्तिचित्रों पर सोने की पॉलिश के लिए प्रसिद्ध है।
  • लोहार्गल अरावली पर्वतमाला में स्थित एक तीर्थस्थल है।
  • मण्डावा नगर भित्तिचित्रयुक्त हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है।
  1. दोसा(rajasthan gk)
  • भगवान राम के वंशज कछवाहा राजाओं की राजधानी और उनके साम्राज्य विस्तार में दौसा का सर्वाधिक योगदान रहा है।
  • दौसा ढढ़ास प्रदेश की प्रथम राजधानी थी। ढढ़ास प्रदेश कछवाहा शासकों का गढ़ माना जाता है।
  • दीसा का प्राचीन नाम ‘देवास’ या ‘धीसा’ है। पूर्व समय में दीसा निकुम्म राजपूतों की प्राचीन राजधानी रहा है।
  • दौसा जिले की स्थापना 10 अप्रैल, 1991 को हुई थी। पहले यह जयपुर जिले का हिस्सा था।
  • महाराणा सांगा की मृत्यु दौसा के ‘बसवा’ नामक स्थान पर हुई थी। दौसा के निकट आगरा-जयपुर मार्ग पर मेंहदीपुर बालाजी का सुप्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
  • ‘आभानेरी निकुम्म राजपूतों की प्राचीन राजधानी रहा है। दौसा जिले में स्थित भाण्डरेज प्राचीन कला व संस्कृति का केन्द्र है।
  1. सीकर(rajasthan gk)
  • राजस्थान राज्य के गठन के पूर्व ‘सीकर जिले का वर्तमान क्षेत्र पूर्वकालीन जयपुर राज्य का एक हिस्सा था।
  • खण्डेला के राजा बहादुर सिंह ने राव दौलत सिंह को वीरभान का ‘वास’ नामक गाव भेंट किया था। शेखाजी की
  • 10वीं पीढ़ी के वंशज शिव सिंह ने वीरमान के वास का नाम ‘सीकर रखा।
  • इन्होंने ही सीकर को नगर का रूप प्रदान किया।
  • सीकर जिले को ‘शेखावटी का हृदय स्थल’ कहा जाता है।
  • 1744 ई. में राव दौलत सिंह ने स्थायी निवास हेतु किला तथा मोहनजी मंदिर बनवाया।
  • 1859 में इस क्षेत्र में तात्या टोपे ने प्रवेश कर जनचेतना के स्वरूप को प्रभावित करते हुए सीकर नगर के निकट कर्नल होम्स की सेनाओं को परास्त किया।
  • यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मदनमोहन मालवीय के सहयोगी जमनालाल
  • बजाज का जन्म व कर्म स्थली के रूप में जाना जाता है।
  • राजस्थान का प्रथम कृषि विज्ञान केन्द्र सीकर में ही स्थापित किया गया है। (फतेहपुर में)।
  • सीकर राजस्थान के हाइटेक जिले के रूप में जाना जाता है।
  • भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत का जन्म स्थान खाचरियावास (सीकर)में है।
  • सीकर जिले का प्राचीन नाम ‘वीरभान का वास है।
  • गुरारा में की गई खुदाई में चांदी के बने 2744 पंचमार्क सिक्के प्राप्त हुए हैं।
  • अरावली पर्वत में शक्तिपीठ के रूप में जीणमाता का मंदिर स्थित है।
  • जीणमाता को जयंती देवी भी कहा जाता है।
  1. नागौर(rajasthan gk)
  • प्राचीन शिलालेखों व इतिहासविदों के अनुसार नागौर का प्राचीन नाम ‘अहिछत्रपुर था।
  • दो हजार वर्षों तक नागवंशीय राजाओं द्वारा शासन के बाद इस पर परमार राजपूतों ने शासन किया।
  • मुगल शासन के शक्तिहीन होने के पश्चात जोधपुर के राठौड़ राजाओं का नागौर पर अधिकार हो गया। मुगल सम्राट शाहजहाँ ने राजा अमर सिंह राठौड़ को यह नगर प्रदान किया था।
  • अमर सिंह राठौड़ की शौर्य गाथाओं के कारण नागौर इतिहास में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
  • कृष्णभक्त मीराबाई की जन्मस्थली मेडता’ नागौर जिले में ही स्थित है।
  • मीराबाई को राजस्थान की राधा’ के नाम से जाना जाता है। विश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक जम्मेश्वर जी का अवतार भी नागौर जिले के ‘पीपासर” गाँव में हुआ था
  • भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात नागीर को जिला मुख्यालय का दर्जा दिया गया।
  • तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को नागौर में ही ‘पंचायती राज’ की शुरुआत की थी।
  • नागौर जिले को मध्यकालीन ‘वैभव की नगरी के रूप में जाना जाता है। राजस्थान में सर्वाधिक पशु मेले का आयोजन नागौर जिले में होता है।
  • नागौर जिले के गोटन में सफेद सीमेंट का कारखाना स्थित है।
  • सर्पों के लोकदेवता तेजाजी का जन्मस्थल ‘खरनाल’ नागौर जिले में स्थित है।
  • नागौर में खारे जल की झील ‘डीडवाना’ और पाड़ामाता का मंदिर दर्शनीय है।
  • इसे सरकी माता भी कहते हैं।
  • डीडवाना में सोडियम सल्फेट का एक कारखाना स्थापित है।
  • नागौर जिले के गोठ मंगलोद में जिले का सबसे प्राचीन मंदिर ‘दधि माता का मंदिर’ स्थित है। दधिमती माता दाधचि ब्राह्मणों की कुल देवी है।
  • मकराना संगमरमर के लिए विश्वविख्यात है।
  • आगरा स्थित ताजमहल, दिलवाड़ा के जैन मंदिर एवं कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल का निर्माण मकराना के संगमरमर पत्थरों से किया गया है।
  • अकबर का दरबारी कवि बीरबल मकराना के गाँव ‘गुणावती’ का रहने वाला था ।
  1. जालौर(rajasthan gk)
  • महर्षि जाबलि की तपोभूमि होने के कारण जिले के प्रमुख नगर का नाम ‘जाबलिपुर” तथा कालांतर में ‘जालौर हो गया।
  • प्रतिहार नरेश नागभट्ट द्वितीय ने अपनी सीमा का विस्तार अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक किया।
  • सोनपरा चौहानों ने इसे परमारों से छीनकर अपनी राजधानी बनाया। 7वीं शताब्दी में जालौर के निकट भीनमाल में चीनी यात्री ‘ह्वेनसांग’ भारत आया।
  • 1455 ई. में जालौर के प्रसिद्ध शासक कान्हडेद और अलाउद्दीन खिलजी के युद्ध को आधार बनाकर प्रसिद्ध ग्रंथ ‘कान्हडदे प्रबंध’ की रचना की।
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व जालौर जिला तत्कालीन जोधपुर रियासत का हिस्सा था।
  • 30 मार्च, 1949 को राजस्थान निर्माण के समय जोधपुर रियासत के साथ इसका राजस्थान राज्य में विलय हो गया।
  • मलिक शाह पीर की दरगाह जालौर में स्थित है। इस दरगाह पर उर्स का आयोजन होता है जो धार्मिक एकता और हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के समन्वय का प्रतीक है।
  • खगोलशास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान ब्रह्मगुप्त जालौर जिले में ही रहते थे और ‘ब्रह्म सिद्धांत’ नामक ग्रंथ की रचना की थी।
  • भीनमाल स्थित वराह श्याम मंदिर भारत के प्राचीनतम गिने चुने मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर में वराह की मूर्ति जैसलमेर के पीले पत्थरों से निर्मित है।
  • जालौर स्थित सांचेर’ को ‘राजस्थान का पंजाब’ कहा जाता है।
  • अरावली पर्वत श्रृंखला में 1220 मीटर की ऊंचाई पर सुन्या पर्वत पर चामुण्डा देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
  1. बारां(rajasthan gk)
  • 14वी-15वीं शताब्दी में बारां सोलंकी राजपूतों के अधीन था।
  • उस समय इसके अन्तर्गत 12 गांव आते थे। इसलिए यह नगर ‘वारा’ कहलाया।
  • बारा नगर काली सिंध, पार्वती व परवन नदियों के बीच स्थित है। इसकी समुद्रतल से ऊँचाई 262 मीटर है।
  • मार्च, 1948 में जब संयुक्त राजस्थान बना उस समय बारा एक जिला था, लेकिन मार्च, 1949 में बारां को जिले से तोड़कर उपखंड में बदल दिया गया। 10 अप्रैल. 1991 को पुनः वारों को जिले का दर्जा प्रदान किया गया।
  • बारा जिला राज्य पक्षी ‘गोडावण’ की शरण स्थली है। शेरगढ़ अभयारण्य बारा जिले में स्थित है।
  • भंडदेवरा प्राचीन मंदिर में मिथुन मूर्तियों के कारण इसे ‘हाड़ौती का खजुराहो या ‘मिनी खजुराहों’ कहते हैं। यहाँ पर पूर्व समय में 108 मंदिरों का एक समूह था।
  • यदुवंशी राजा अर्जुन सिंह द्वारा 1348 ई. में कल्याणपुरी रियासत की स्थापना हुई जो कालांतर में ‘करौली’ नाम से प्रचलित हुआ ।
  1. करौली(rajasthan gk)
  • 17 मार्च, 1948 ई. में करौली रियासत के रूप में मत्स्य संघ में सम्मिलित हुआ। बाद में 15 मई, 1949 को इसका राजस्थान में विलय हो गया।
  • 19 जुलाई, 1997 ई. को सवाई माधोपुर से पृथक कर करौली को राज्य का 32वां जिला बनाया गया।
  • करौली जिले को ‘कैलादेवी की भूमि’ और ‘गोपाल पाल की भूमि कहा जाता है।
  • पांचना बांध परियोजना करौली जिले में स्थित है। करौली में कैला देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ पर माता कैलादेवी (महालक्ष्मी) और माता चामुण्डा देवी की प्रतिमाएं हैं।
  • कैला देवी अभयारण्य करौली जिले में स्थित है।
  • करौली जिले में चन्दन गांव के निकट संगमरमर का महावीर जी का 400 वर्ष पुराना मंदिर है।
  1. प्रतापगढ़(rajasthan gk)
  • 1699 ई. में महारावल प्रताप सिंह ने प्रतापगढ़ रियासत की स्थापना की। प्रतापगढ़ जिले का पुराना नाम ‘डोडेरिया खेड़ा था।
  • यहां के राजा सालिम सिंह ने सालिमशाही सिक्के चलाये थे।
  • 1945 ई. में अमृतलाल पाठक ने प्रतापगढ़ प्रजामंडल की स्थापना की। प्रतापगढ़ स्थित काकाजी की दरगाह को ‘कांठल का ताजमहल’ कहते हैं।
  • 26 जनवरी, 2008 को प्रतापगढ़ राजस्थान का 33वां जिला बना ।
  • 1 अप्रैल, 2008 को प्रतापगढ़ जिला विधिवत रूप से कार्य करने लगा।
  • प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच ‘छप्पन का मैदान’ स्थित है।
  • प्रतापगढ़ जिले को ‘कांठल प्रदेश’ भी कहा जाता है।
  • सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य प्रतापगढ़ जिले में स्थित है। यह अभयारण्य उड़न गिलहरी के लिए सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। इस दुर्लभ उड़न गिलहरी को मसोवा भी कहते हैं।
  • गौतमेश्वर का मेला प्रतापगढ़ के ‘अरनोद’ नामक स्थान पर लगता है। यह आदिवासियों का प्रमुख मेला है। अरनोद को ‘कांठल का हरिद्वार’ भी कहते हैं। अरनोद प्रतापगढ़ जिले का एतिहासिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र है। अरनोद को प्रातःकालीन सूर्योदय की स्थ के रूप में जाना जाता है।
  • जाखम बांध परियोजना प्रतापगढ़ जिले में स्थित है।
  • ‘छोटी सादड़ी’ को ‘प्रतापगढ़ जिले की स्वर्ण नगरी’ के नाम से जाना जाता है।
  • प्रतापगढ़ जिले में प्रवाहित होने वाली माही नदी को ‘दक्षिण राजस्थान की गंगा कहते हैं। इस नदी में स्नान करना पवित्र माना जाता है।(rajasthan gk)
  • प्रतापगढ़ जिला अवस्थित केसरपुरा में हीरा पाया जाता है।

 

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